किसी भी भारतीय रसोई में चीनी केवल एक खाद्य सामग्री नहीं, बल्कि दैनिक जीवन का एक अनिवार्य हिस्सा है—सुबह की पहली चाय से लेकर त्योहारों की मिठास तक। लेकिन पिछले एक महीने के भीतर चीनी के दाम में सीधे ₹30 प्रति किलो तक का भारी उछाल न केवल चौंकाने वाला है, बल्कि आम परिवारों और छोटे-बड़े उद्योगों की आर्थिक कमर तोड़ने वाला साबित हो रहा है। आवश्यक वस्तुओं में इस तरह की अप्रत्याशित तेजी सीधे तौर पर घरेलू बजट और औद्योगिक संतुलन को बिगाड़ देती है।
इस अनियंत्रित मूल्य वृद्धि पर सरकार को तत्काल और ठोस कदम उठाने की आवश्यकता है-
मासिक रिलीज कोटा में वृद्धि- घरेलू बाजार में तरलता और उपलब्धता बढ़ाने के लिए चीनी मिलों के मासिक बिक्री कोटे को तत्काल बढ़ाया जाए, जिससे खुले बाजार में पर्याप्त आपूर्ति हो सके।
जमाखोरी और सट्टेबाजी पर सख्त निगरानी- अचानक आई इस तेजी के पीछे थोक स्तर पर कृत्रिम कमी पैदा करने वाले जमाखोरों पर राज्य और केंद्र स्तर पर सख्त प्रशासनिक कार्रवाई होनी चाहिए।
बफर स्टॉक से सीधी आपूर्ति- सरकार को अपने आरक्षित भंडार से उचित मूल्य की दुकानों और खुले बाजार में नियंत्रित दरों पर चीनी उतारनी चाहिए ताकि बाजार के भाव तुरंत नीचे आएं।
एथेनॉल और निर्यात नीतियों का सामंजस्य- घरेलू खाद्य सुरक्षा और मूल्य स्थिरता को प्राथमिकता देते हुए एथेनॉल डाइवर्जन और चीनी निर्यात से जुड़े नियमों की तत्कालिक समीक्षा की जानी चाहिए।
नारायण जैन अध्यक्ष व्यापार एवउद्योग बीकानेर













