
चुनाव आते ही सोशल मीडिया पर वादों और तस्वीरों की जो ‘बरसात’ शुरू होती है, वह जनता के घावों पर नमक छिड़कने जैसी लगती है।
चुनाव आते ही सोशल मीडिया पर वादों और तस्वीरों की जो ‘बरसात’ शुरू होती है, वह जनता के घावों पर नमक छिड़कने जैसी लगती है। *कुर्सी का ‘मोह’ या जनता की ‘सेवा’?* — बीकानेर के गलियारों से उठती टीस इन दिनों सोशल मीडिया का पेज खोलो तो लगता है जैसे बीकानेर में अचानक ‘जनसेवकों’ की बाढ़ आ गई है। नए-नए चेहरे, हाथ जोड़े हुए पोस्टर, बड़ी-बड़ी बातें और लंबे-चौड़े वादे। “मैं सड़क बनवा दूंगा…” “मैं स्ट्रीट लाइटें ठीक करवा दूंगा…” “मैं नालियों की सफाई करवा दूंगा…” लेकिन इन वादों






















