February 20, 2026 12:16 am

सरकारी स्कूलों में फिर पांच-साल की उम्र में होंगे एडमिशन:नामांकन बढ़ाने के लिए आयु सीमा में छूट; अगले सत्र तक पुराने आदेश स्थगित

*सरकारी स्कूलों में फिर पांच-साल की उम्र में होंगे एडमिशन:नामांकन बढ़ाने के लिए आयु सीमा में छूट; अगले सत्र तक पुराने आदेश स्थगित*

 

प्रदेश के सरकारी स्कूलों में घटते नामांकन को लेकर शिक्षा विभाग ने यू-टर्न लिया है अब सरकारी स्कूलों में बच्चों को पहली क्लास में एडमिशन पांच साल की उम्र में ही मिलेगा, जबकि पिछले सत्र में आयु सीमा 6 साल कर दी गई थी

 

सरकारी स्कूलों में घटते नामांकन को देखते हुए शिक्षा विभाग ने आगामी सत्र तक पुराने आदेश को भी स्थगित कर दिया है। हालांकि यह आदेश आगामी सत्र- 2026-27 के लिए ही है

 

कोटा जिला शिक्षा अधिकारी रामचरण मीणा ने बताया कि आयु सीमा को कम करने के पीछे कारण है कि सरकारी स्कूलों में नई आयु सीमा लागू करने के बाद से नामांकन गिरने लगा था पहले जहां कक्षा 1 में 5 साल की उम्र वाले बच्चों का एडमिशन हो जाता था, वहीं नई शिक्षा नीति के तहत इसे 6 साल कर दिया गया था

 

जिसके बाद सरकारी स्कूलों में प्रवेश लेने वाले बच्चों की संख्या कम होने लगी थी। मजबूरी में पेरेंटस निजी स्कूलों की तरफ रूख करने लगे थे। प्राइवेट स्कूल 3 से 4 साल के बच्चों को एलकेजी-यूकेजी में प्रवेश दे रहे हैं। ऐसे में प्राइवेट स्कूलों में तो नामांकन बढ़े, लेकिन सरकारी स्कूलों का घट गए

 

आयु सीमा 6 साल को कम कर 5 साल करने को लेकर शिक्षा निदेशक सीताराम जाट ने सार्वजनिक सूचना जारी की है, जिसमें शैक्षिक सत्र-2026-27 में कक्षा प्रथम में प्रवेश के आयु निर्धारण के संबंध में राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी-2020) के अनुसार 6 साल से कम उम्र के बच्चों को कक्षा 1 में प्रवेश नहीं दिए जाने एवं 5 साल की आयु के बच्चों को बाल वाटिका में शामिल किए जाने के निर्देश दिए हैं

 

आदेश में कहा गया है कि यह समय सीमा पिछले साल ही अपनाई गई और पूरे राज्य में अभी भी बाल वाटिकाएं बननी बाकी हैं ऐसे में 3 साल की पूर्व प्राथमिक शिक्षा पूरी कर चुके किसी भी बच्चे को शामिल करने के लिए 6 साल की समय सीमा में 31 जुलाई, 2026 तक छूट प्रदान की जाती है

 

*गिरते नामांकन से पीछे हटा विभाग*

 

विभाग की ओर से पहले कक्षा एक में दाखिले की आयु सीमा 6 साल कर दी थी इधर, पेरेंटस अपने बच्चों को घर पर तो बैठाकर नहीं रख सकते। उन्हें स्कूल में एडमिशन करवाना पड़ता है, क्योंकि साल का गेप लग जाता है इसी वजह से पेरेंटस प्राइवेट स्कूलों की तरफ रूख कर गए। एक बार प्राइवेट स्कूल में एडमिशन के बाद बच्चे या पेरेंटस भी दोबारा सरकारी स्कूल में एडमिशन नहीं करवाते फिलहाल एक साल के लिए ये परिवर्तन किया गया है, लेकिन इससे कक्षा एक में नामांकन बढ़ने की उम्मीदें हैं

 

शिक्षक संगठनों ने बाल वाटिका को प्रभावी ढंग से संचालित करने, आयु सीमा में संशोधन की मांग उठाई थी। इन्हीं के दबाव और लगातार गिरते नामांकन को देखते हुए शिक्षा विभाग ने आदेश में संशोधन किया है जिसमें एक वर्ष के लिए पुरानी आयु सीमा को ही लागू रखने का निर्णय लिया है

 

*बाल वाटिकाएं यानी प्री-स्कूल को मजबूत करेंगे*

 

सरकारी स्कूलों में भी निजी स्कूलों की तरह प्री स्कूलिंग करवाई जानी है इसके लिए बाल वाटिकाएं बननी हैं। अभी तक सरकारी स्कूलों में ये नहीं बनी हैं। ऐसे में शिक्षा विभाग के पास अब एक साल का समय और है कि इन बाल वाटिकाओं को मजबूत कर सके और पूरी तैयारी के लिए बच्चों का इनमें एडमिशन हो सके

 

*वर्तमान सत्र में भी बढ़ा है नामांकन*

 

वहीं जिला शिक्षा अधिकारी ने बताया कि इस बार नए सत्र में सरकारी विद्यालयों में प्रवेश प्रक्रिया 1 अप्रैल से शुरू की जाएगी। पिछले साल कक्षा-1 में दाखिले की आयु सीमा 6 साल की गई थी। जिसका असर नामांकन पर भी दिखा विभाग ने इसी समस्या को देखते हुए सकारात्मक कदम उठाया और आयु सीमा में 31 जुलाई 2026 तक छूट प्रदान की है जिसके तहत अब 5 साल के बच्चों को कक्षा-1 में दाखिला मिल सकेगा इससे प्रदेशभर के सरकारी स्कूलों में नामांकन में बढ़ोतरी होगी। हालांकि, वर्तमान सत्र में भी सरकारी विद्यालयों में नामांकन में बढ़ोतरी हुई है

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