*जोधपुर।* विश्व स्तरीय गो चिकित्सालय ग्राम रलावास, जोधपुर के अध्यक्ष कालुराम प्रजापत ने बताया कि पुरूषोतम मास में महिला मण्डल, जोधपुर द्वारा आयोजित भागवत कथा के पंचम दिवस की कथा में कथा का वाचन करते हुए कथा वाचिका सुशीला व्यास ने श्रद्धालुओं को कहा कि बिना साधना के भगवान का सानिध्य नहीं मिलता। द्वापर युग में गोपियों को भगवान श्री कृष्ण का सानिध्य इसलिए मिला, क्योंकि वे त्रेता युग में ऋषि मुनि के जन्म में भगवान के सानिध्य की इच्छा को लेकर कठोर साधना की थी। शुद्ध भाव से कि गई परमात्मा की भक्ति सभी सिद्धियों को देने वाली है।
तत्पश्चात् भगवान और गोपियों के संवाद का वर्णन करते हुए कथा वाचिका ने कहा कि गोपियों ने भगवान को 3 प्रकार के मनुष्य के बारे में पूछा 1. वह व्यक्ति जो प्रेम करने वाले से प्रेम करता हो 2. जो सबसे प्रेम करता हो चाहे उससे प्रेम करे ना करे 3 प्रेम करने वाले से कोई संबंध ना रखता हो और न करने वाले से संबंध ही नही आप इन तीनों में से कौनसी श्रेणी में आते है ? तो प्रभु ने कहा जिस ईन्सान से प्रेम करते है वो आपसे प्रेम करे वह तो स्वार्थ है वहां केवल व्यापार है।
दूसरे श्रेणी में माता-पिता और गुरूजन है , जिससे प्रेम करो चाहे ना करो उनके मन में संतान के प्रति कल्याण की भावना होती है ओर तीसरी श्रेणी में किसी से प्रेम नही करते तो उनके 4 लक्षण है आत्माराम-जो बस अपनी आत्मा में ही रमन करता है, पूर्णकाय वही मानता, गुरूद्रोही-जो उपकार करने वाले को अपना शत्रु समझता हो भगवान ने कहा हे गोपिओ में इनसे से कोई नही हूं। मैं तो तुम्हारे जन्म-जन्मका ऋणियां हूं। सबके कर्जे को में उतार सकता हूं लेकिन तुम्हारे प्रेम के कर्जे को नहीं। संसार में जब-जब प्रेम की गाथा गाई जाएगी वहा पर तुम्हें अवश्य याद करेंगे।
इस दौरान गो चिकित्सालय के सचिव बेबी देवी सैन, पुष्पा गहलोत, आशा सांखला का भी आगमन हुआ
कथा में मंच संचालन गोरीशंकर पारीक द्वारा किया गया।












