“सत्ता का अहंकार नहीं, अपना जमीर देखिए!”**
**बीकानेर।** पीबीएम (PBM) अस्पताल की बदहाली और उस पर चिकित्सा मंत्री के अमानवीय बयान—”प्रसूता नाचती-कूदती आई थी क्या”—के विरोध में आज बीकानेर कच्ची बस्ती विभाग एवं चिकित्सा प्रकोष्ट ने एक अनोखा और बेहद मार्मिक विरोध दर्ज करवाते हुए स्वास्थ्य मंत्री को आईने कोरियर किए। हर पार्सल के साथ कड़े संदेश थे : **”
यह महज़ एक प्रतीकात्मक विरोध नहीं है, बल्कि यह बीकानेर की उस हर माँ, बहन और बेटी के सम्मान की लड़ाई है जो अस्पताल की चौखट पर असहनीय पीड़ा लेकर पहुँचती है। चिकित्सा विज्ञान कहता है कि प्रसव की पीड़ा इंसान द्वारा सहे जाने वाले सबसे भयंकर दर्दों में से एक है—यह जीवन और मृत्यु के बीच का संघर्ष है। ऐसी पीड़ा का मज़ाक उड़ाना और उसे ‘नाचना-कूदना’ कहना, सत्ता के नशे में चूर एक जनप्रतिनिधि की संवेदनहीनता की क्रूरतम पराकाष्ठा है।
इस ‘आईना अभियान’ में डॉक्टर पी के सरीन और नितिन वत्सस ने रोष व्यक्त करते हुए कहा कि एक तरफ बीकानेर का पीबीएम अस्पताल डॉक्टरों, सुविधाओं और संसाधनों की भारी कमी से जूझ रहा है। व्यवस्था को सुधारने और मरीजों को राहत देने के बजाय, दर्द से कराहती महिलाओं का इस तरह सरेआम उपहास उड़ाना यह दर्शाता है कि कुर्सी के अहंकार में सत्ताधीशों की इंसानियत मर चुकी है।
मंत्री के इसी सोए हुए जमीर को झकझोरने के लिए बीकानेर से ये आईने भेजे गए हैं।
अध्यक्ष नारायण जैन ने बताया की इन आइनो के साथ डिब्बे में एक पत्र भी भेजा गया है, जिसमें लिखा है:
> *”तुम क्या जानो उस दर्द की कीमत, जो जन्म देते वक्त एक माँ ने उठाया है,*
> *सत्ता के अहंकार में तुमने, इंसानियत और मातृत्व का मज़ाक बनाया है।”*
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हम बीकानेरवासी स्पष्ट करना चाहते हैं कि हम अस्पताल में जश्न मनाने नहीं, बल्कि अपनी और अपनों की जान बचाने की आस लेकर जाते हैं। जब तक मंत्री महोदय अपने इस शर्मनाक और मातृ-शक्ति का अपमान करने वाले बयान के लिए सार्वजनिक और बिना शर्त माफ़ी नहीं मांगते, बीकानेर की जनता यह अपमान नहीं भूलेगी। आज कोरियर किए गए ये आईने सिर्फ एक शुरुआत हैं; अगर माफ़ी नहीं आई, तो हर मोर्चे पर उन्हें उनकी संवेदनहीनता का अक्स दिखाती रहेगी ।
नीरज शर्मा ,ललित सिक्का ,एजाज अहमद ,प्रदीप सिंह ,कुलदीप भोजक आदि उपस्थित रहे !













