*करोड़ों की इमारतें बनीं, लेकिन पार्किंग नदारद; सड़कों पर जाम से आमजन और मरीज बेहाल।*
**- विशेष समीक्षक, नारायण जैन**
शहर में स्वास्थ्य सुविधाओं का विस्तार एक सकारात्मक कदम है। लेकिन इन सुविधाओं के साथ एक नई और गंभीर समस्या शहर की धमनियों को चोक कर रही है – वह है ‘पार्किंग का घोर अभाव’। बीकानेर के कई प्रमुख अस्पताल और सुपर स्पेशलिटी सेंटर बड़ी-बड़ी बहुमंजिला इमारतों में संचालित हो रहे हैं, लेकिन जब बात मरीजों और उनके परिजनों के वाहनों को खड़ा करने की आती है, तो व्यवस्थाएं पूरी तरह शून्य नजर आती हैं।
हाल ही में सामने आई तस्वीरें इस प्रशासनिक अव्यवस्था की प्रत्यक्ष गवाह हैं। आयुष्मान हार्ट केयर सेंटर, बीकानेर हार्ट एंड सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल, श्री राम हॉस्पिटल और मारवाड़ हॉस्पिटल,जीवन रक्षा जैसी बड़ी चिकित्सा इकाइयों के बाहर सड़क पर बेतरतीब खड़े वाहन शहर की यातायात व्यवस्था को लकवाग्रस्त कर रहे हैं। करोड़ों रुपये खर्च करके चमचमाती इमारतें तो खड़ी कर दी गईं, लेकिन भवन निर्माताओं और अस्पताल प्रबंधन ने पार्किंग के लिए जगह छोड़ना शायद जरूरी ही नहीं समझा।
मुख्य मार्गों के एक बड़े हिस्से पर बाइकों, कारों और ऑटो-रिक्शा का अवैध कब्जा रहता है। इसके कारण न केवल आम राहगीरों और वाहन चालकों को भारी जाम का सामना करना पड़ता है, बल्कि सबसे बड़ा और गंभीर खतरा तो उन मरीजों के लिए है जो आपात स्थिति में एंबुलेंस में फंसे रहते हैं। सवाल यह उठता है कि क्या इन संस्थानों ने इलाज के नाम पर शहर की सार्वजनिक सड़कों को अपनी निजी जागीर समझ लिया है?
यह सिर्फ अस्पताल प्रबंधन की लापरवाही नहीं है, बल्कि नगर निगम, यूआईटी और यातायात पुलिस की कार्यप्रणाली पर भी एक बहुत बड़ा सवालिया निशान है। आखिर बिना पार्किंग सुविधा सुनिश्चित किए इन भारी-भरकम व्यावसायिक इमारतों को एनओसी (NOC) कैसे जारी कर दी गई? क्या प्रशासन तब तक सोता रहेगा जब तक कि कोई बड़ा हादसा न हो जाए? जिस तरह से शहर में कुछ समय पहले मुख्य मार्गों के बाधित होने से नागरिकों ने भारी परेशानी झेली थी, ठीक उसी तरह अब इन अस्पतालों के बाहर रोज लगने वाला यह अघोषित जाम शहर के लिए नासूर बन चुका है।
अब समय आ गया है कि प्रशासन सख्ती दिखाए। ऐसे सभी अस्पतालों को अपनी इमारतों में या आसपास पार्किंग की उचित व्यवस्था करने के लिए पाबंद किया जाना चाहिए। सड़क पर अतिक्रमण करने वाले वाहनों पर केवल चालान काटना ही कोई स्थायी उपाय नहीं है। नागरिकों का इलाज और स्वास्थ्य बेहद जरूरी है, लेकिन इसकी कीमत बीकानेर शहर की शांति और सुचारू यातायात व्यवस्था हरगिज नहीं हो सकती।













