जयपुर/नई दिल्ली: यदि आप उन करोड़ों मोबाइल उपभोक्ताओं में से हैं जो बिना जरूरत के भी महंगे डेटा पैक का पैसा दे रहे हैं, तो केंद्र सरकार आपके लिए एक बड़ी खुशखबरी लेकर आई है। दूरसंचार क्षेत्र में बड़े सुधारों की तैयारी करते हुए सरकार ने एक नया ड्राफ्ट तैयार किया है, जिससे मोबाइल बिल का बोझ काफी कम होने की उम्मीद है।
प्रमुख बदलाव जो आपकी जेब को देंगे राहत
सरकार के नए प्रावधानों के अनुसार, टेलीकॉम कंपनियों को अब अपनी रणनीति बदलनी होगी। यहाँ मुख्य बिंदु दिए गए हैं:
डेटा की अनिवार्यता खत्म: अब “कॉल प्लान” के साथ डेटा लेना जरूरी नहीं होगा। कंपनियाँ ऐसे प्लान पेश करेंगी जिनमें केवल इनकमिंग, आउटगोइंग और मैसेज (SMS) की सुविधा होगी। यह उन बुजुर्गों और यूजर्स के लिए वरदान होगा जो इंटरनेट का उपयोग नहीं करते।
28 नहीं, अब पूरे 30 दिन की वैलिडिटी: सालों से चली आ रही ’28 दिनों के महीने’ की व्यवस्था खत्म होगी। अब मासिक प्लान पूरे 30 दिन का होगा। वहीं, छोटे प्लान की अवधि भी कम से कम 7 दिन निश्चित की गई है।
सस्ते होंगे प्लान: अनुमान है कि केवल वॉयस कॉलिंग वाले प्लान आने से औसत खर्च ₹300 से ₹350 के बीच सिमट जाएगा, जो फिलहाल डेटा पैक के कारण काफी अधिक है।
लंबी वैधता के विकल्प: बिना डेटा वाले वॉयस प्लान की अधिकतम वैधता 1 साल तक हो सकेगी, जिससे बार-बार रिचार्ज के झंझट से मुक्ति मिलेगी।
कब से लागू होंगे नए नियम?
केंद्र सरकार द्वारा तैयार किए गए इस ड्राफ्ट को अंतिम रूप दिया जा रहा है। सूत्रों के मुताबिक, जून या जुलाई 2026 तक इन नए प्रावधानों को पूरे देश में लागू किया जा सकता है।
विशेषज्ञों की राय: > “यह कदम डिजिटल डिवाइड को पाटने और उन लोगों को राहत देने के लिए है जो सिर्फ कनेक्टिविटी चाहते हैं, भारी-भरकम डेटा नहीं। इससे टेलीकॉम बाजार में प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी और ग्राहकों को अपनी जरूरत के हिसाब से चुनने की आजादी मिलेगी।”













