June 3, 2026 10:21 pm

विश्व पत्रकारिता  दिवस

*✍️“कीमत से परे कलम”✍️*

 

*वो कीमत लगा रहे थे पत्रकारिता की,*

*मैंने भी मुस्कुरा कर कह दिया*

*कीमत कोई भी हो साहब*,

*मुझे दो कौड़ी का नहीं बनना।*

 

*तुम्हारे पास दौलत होगी, रसूख होगा,*

*तुम्हारी मेज़ों पर नोटों की चमक होगी,*

*पर मेरे पास जो है*

*वो बिकता नहीं…*

*वो है मेरा ज़मीर, मेरी आवाज़, मेरी कलम।*

 

*तुमने सोचा होगा,*

*जैसे हर चीज़ खरीदी जाती है इस दुनिया में,*

*वैसे ही खबर भी बिक जाएगी,*

*वैसे ही सच भी झुक जाएगा*

*पर तुम भूल गए,*

*कुछ लोग अभी भी ज़िंदा हैं*

*जो अपने शब्दों को सांस की तरह जीते हैं।*

 

*कलम बेची नहीं जाती,*

*ये तो भीतर उठती हुई वो पुकार है*

*जो रातों की नींद छीन लेती है,*

*जो अन्याय देख कर चुप नहीं बैठती।*

 

*और जो बिक गई बाजारों में*,

*वो खबर नहीं इश्तिहार होती है,*

*वो आवाज़ नहीं गूंज होती है*

*किसी और के इशारों की।*

 

*मैंने देखे हैं वो चेहरे,*

*जो कभी सच के लिए जले थे,*

*आज उन्हीं के हाथों में*

*सौदों की फाइलें हैं।*

 

*मैंने सुनी हैं वो आवाज़ें,*

*जो कभी सवाल करती थीं,*

*आज वही आवाज़ें*

*स्क्रिप्ट पढ़ती हैं…*

*और तालियाँ बटोरती हैं।*

 

*पर मैं…*

*मैं उस भीड़ का हिस्सा नहीं बन सकता,*

*जहाँ आत्मा गिरवी रखी जाती है*

*और खबरों का वजन*

*नोटों से तौला जाता है।*

 

*सच लिखने की सज़ा भी मंज़ूर है मुझे,*

*पर झूठ की बोली में शामिल नहीं होना,*

*तुम सौदे करते रहो सियासत के मेले में,*

*मुझे अपनी आत्मा से गद्दारी नहीं करना।*

 

*तुम्हारे लिए ये धंधा होगा,*

*मेरे लिए ये धर्म है*

*जहाँ हर शब्द*

*एक जिम्मेदारी है,*

*जहाँ हर खबर*

*एक जवाबदेही है।*

 

*तुम कहते हो“कीमत बताओ”,*

*मैं कहता हूँ“हिम्मत लाओ”,*

*क्योंकि सच लिखने के लिए*

*जेब नहीं,*

*सीना चाहिए।*

 

*तुम्हारी दुनिया में*

*सब कुछ बिकता होगा*

*ईमान, रिश्ते, फैसले,*

*पर मेरी दुनिया में*

*कुछ चीज़ें आज भी अमूल्य हैं।*

 

*मैं वही रहूँगा*

*स्याही से लड़ता, सवालों से जूझता,*

*हर उस दरवाज़े पर दस्तक देता*

*जहाँ सच को कैद किया गया है।*

 

*तुम्हारे इशारों पर*

*मैं अपना ईमान नहीं मोड़ूँगा,*

*तुम्हारी मेहरबानियों के बदले*

*मैं अपने शब्द नहीं तोड़ूँगा।*

 

*और सुन लो*

*ये जो तुम कीमतों का खेल खेलते हो,*

*एक दिन यही बाजार*

*तुम्हारी पहचान निगल जाएगा।*

 

*क्योंकि इतिहास ने हमेशा*

*खरीदारों को नहीं,*

*सच लिखने वालों को याद रखा है।*

 

*मैं तस्वीरों का मोहताज नहीं,*

*मैं तारीख़ का हिस्सा बनना चाहता हूँ,*

*जहाँ मेरे शब्द*

*किसी की आँख खोलें,*

*किसी की आवाज़ बनें।*

 

*तो रख लो अपनी दौलत,*

*सजा लो अपने सौदे,*

*मैं उस रास्ते का मुसाफिर हूँ*

*जहाँ कदम डगमगाते हैं,*

*पर आत्मा सीधी खड़ी रहती है।*

 

*मैं पत्रकार हूँ*

*बेचने वाला नहीं,*

*जगाने वाला हूँ।*

 

*और याद रखना*

*जिस दिन सच ने करवट बदली,*

*उस दिन तुम्हारे हर सौदे पर*

*मेरे शब्द ही*

*सबसे बड़ा तमाचा बनकर गिरेंगे।*

 

 

*विश्व पत्रकारिता स्वतंत्रता दिवस की सभी पत्रकार साथियों को 3 मई 2026 की हार्दिक शुभकामनाएं*

 

🙏✍️🌻🌹🌻🌹🌼🌼🙏

फ्रंट भारत न्यूज नेटवर्क

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