राम चरित्र मनुष्य को भोग नहीं त्याग सीखाता है- कथा वाचिका

*जोधपुर।* विश्व स्तरीय गो चिकित्सालय ग्राम रलावास, जोधपुर के अध्यक्ष कालुराम प्रजापत ने बताया कि पुरूषोतम मास में महिला मण्डल, जोधपुर द्वारा आयोजित भागवत कथा के चतृर्थ दिवस की कथा में कथा का वाचन करते हुए कथा वाचिका सुशीला व्यास ने श्रीराम की लीलाओं का संक्षिप्त वर्णन करते हुए कहा चारों भाईयों में एक दूसरे के प्रति प्रेम और त्याग एक दूसरे के प्रति अलैकिक था। रामायण जीवन जीने की सबसे उत्तम शिक्षा देती है।

जब राम अपने पिता की आज्ञा से वन की ओर चले गए तो भाई लक्ष्मण उनके बिना रह नहीं पाये तो भगवान के साथ वन को प्रस्थान हुए,भाई भरत नंदिग्राम में तपस्वी बन कर रहने लगे,और भाई शत्रुधन उसी दरवाजे के भीतर एक पत्थर की शील का तकिया बनाकर 14 साल लेटे रहे। ये है भाईयों का प्रेम राम को जब राम राज्य नहीं मिला तो उनके पीछे उनके भाईयों ने राज-पाठ का सुख त्याग करके उनके आने का इंतजार किया। आगे उन्होंने कहा कि रावण एक कुशल राजनितिज्ञ,सेनापति और वास्तु कल का मर्मज्ञ होने के साथ-साथ तत्व ज्ञानी तथा बहु विद्याओं का जानकार था। उसे मायावी इसलिए कहा जाता था कि वे इंद्रजाल,संग सम्मोहन और तरह-तरह के जादू जानता था। उनके पास एक ऐसा विमान था,जो अन्य किसी के पास नहीं था।

इतना महान दैत्यधिराज होने के बावजूद रावण श्रीराम से हार गया क्योंकि उसके साथ उसका ही अपने भाई का साथ नहीं था। यही बात राम कथा में हमें सीखने को मिलती है कि मनुष्य को अपने जीवन को कैसे जीना चाहिए। अपनों के साथ कैसे रहना चाहिए।

 

कथा वाचिका ने बताया कि आज ही के दिन बालकृष्ण ने कंस जैसे पापी का उद्धार करने हेतु अवतार लिया। भगवान बाल कृष्ण के जन्मोत्सव पर आस पास के अनेको क्षेत्रों से आए बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं नेें नृत्य का आनन्द लिया।

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