कृषि विभाग, कृषि विज्ञान केन्द्र व भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद संस्था का सांझा प्रयास: ‘खेत बचाओ अभियान

*30 जून तक ग्राम स्तर पर किसानों से करेंगे संवाद*

 

बीकानेर, 4 जून। कृषि आयुक्तालय से प्राप्त निर्देशानुसार कृषि विभाग, कृषि विज्ञान केन्द्र व भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद संस्थान संयुक्त रूप से ‘खेत बचाओ अभियान’ कार्यक्रम के तहत 30 जून तक ग्राम स्तर गोष्ठी का आयोजन करेगा। इस दौरान किसानों से संवाद किया जाएगा। कार्यक्रम का आयोजन 1 जून से प्रारम्भ हो चुका है।

 

कृषि विभाग, कृषि विज्ञान केन्द्र बीकानेर तथा लूणकरनसर और भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद संस्थान के इंस्टीट्यूट ‘खेत बचाओ अभियान’ में सक्रिय भूमिका में हैं।

 

संयुक्त निदेशक कृषि (विस्तार) श्री मदनलाल ने बताया कि जलवायु परिवर्तन के वर्तमान दौर में खेत की मिट्टी को स्वस्थ बनाने एवं संतुलित पोषण प्रबंध नितांत आवश्यक है। खाद एवं उर्वरकों के संतुलित उपयोग द्वारा उत्पादन में वृद्धि के साथ-साथ कृषि उत्पादों की गुणवत्ता में भी सुधार होता है।

 

‘स्वस्थ मिट्टी, संरक्षित पानी और जागरूक किसान’ यही समृद्ध खेती की पहचान है। कृषकों की रासायनिक खाद पर निर्भरता को कम करने, स्वयं के खेत पर निर्मित जैविक आदानों व विधियों को अपनाने हेतु प्रोत्साहित करने, पारम्परिक एवं उन्नत विधियों के समन्वित उपयोग को प्रोत्साहित करने की दृष्टि से कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय, भारत सरकार के निर्देशानुसार 30 जून तक ‘खेत बचाओ अभियान’ संचालित किया जा रहा है। अभियान के क्रियान्वयन के लिए संबंधित सहायक कृषि अधिकारी नोडल अधिकारी नियुक्त किये गए हैं। कृषि विभाग अधिकारी, केवीके व आईसीएआर संस्थान के वैज्ञानिक किसानों से विस्तृत चर्चा करेंगे।

 

सहायक निदेशक (उद्यान) मुकेश गहलोत ने बताया कि ‘खेत बचाओ अभियान’ के तहत आयोजित कृषक गोष्ठियों में ‘खेत बचाओ अभियान परिचय, उद्देश्य पर चर्चा के साथ -साथ ‘खेत बचाओ अभियान’ में जैविक एवं प्राकृतिक खेती को बढावा देने, मिट्टी परीक्षण एवं इसके अनुनयन को प्रोत्साहन देने, जल संरक्षण एवं कुशलतम उपयोग को बढ़ावा देने, उपयुक्त फसल सुरक्षा अपनाने व समन्वित कृषि प्रबन्धन एवं उपयुक्त फसल चक्र, कृषि मशीनरी का सही उपयोग तथा कृषि उद्यानकी विभाग की योजनाओं की जानकारी प्रमुखता से किसानों को दी जाएगी।

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