जब पोखरण के लोग 50 डिग्री की तपती गर्मी में बिजली और पानी के लिए बिना किसी पार्टी या नेता के सड़कों पर उतर सकते हैं, तो बीकानेर के हम लोग शांत क्यों बैठे हैं? पोखरण ने पूरे राजस्थान को दिखा दिया कि असली ताकत नेताओं के हाथ में नहीं, बल्कि जागरूक जनता के हाथ में होती है।
यह बीकानेर के हर उस नागरिक का दर्द और संकल्प है, जिसे नारायण जैन ने आवाज़ दी है:
1. कब तक भुगतेंगे प्रशासन की लापरवाही?
आज बीकानेर का कोई भी कोना देख लीजिए। मुख्य रास्ते बदहाल हैं, सड़कें महीनों से खुदी पड़ी हैं, और ट्रैफिक व्यवस्था का कोई धनी-धोरी नहीं है। जूनागढ़ जैसे हमारे ऐतिहासिक और व्यस्त इलाकों में पैर रखने की जगह नहीं बचती, व्यवस्थाएं पूरी तरह चरमरा चुकी हैं। जब सड़कें खराब होती हैं या विकास कार्य ठप होते हैं, तो किसी नेता की गाड़ी का टायर नहीं पंचर होता, नुकसान हमारे व्यापार का, हमारी गाड़ियों का और हमारे समय का होता है।
2. वोट बैंक की राजनीति से तंग आ चुका है शहर
हम सालों से देख रहे हैं कि राजनीतिक पार्टियां हमारे मुद्दों को सिर्फ चुनाव और वोट बैंक के चश्मे से देखती हैं। वादे बड़े-बड़े होते हैं, लेकिन काम ज़ीरो। हम अक्सर सिर्फ घरों में बैठकर शिकायत करते हैं और सोचते हैं कि कोई ‘नेताजी’ आएंगे और जादू की छड़ी घुमा देंगे। अब यह भ्रम छोड़ना होगा। नेता सिर्फ सत्ता देखते हैं, व्यवस्था सुधारना उनका काम है पर वो तब तक नहीं करेंगे जब तक जनता मजबूर नहीं करेगी।
3. खैरात नहीं, हमारा हक़ है बुनियादी सुविधाएं!
हम टैक्स देते हैं, कानून का पालन करते हैं, तो फिर सुरक्षित सड़कें, पीने का साफ पानी और बेहतर प्रशासनिक व्यवस्थाएं हमें भीख में नहीं, बल्कि हमारे अधिकार के रूप में मिलनी चाहिए। यह किसी नेता की मेहरबानी नहीं है!
बीकानेर के हर नागरिक, व्यापारी और युवा से नारायण जैन की सीधी अपील:
राजनीति का चश्मा उतार फेंकिए: इस लड़ाई को किसी भी राजनीतिक पार्टी के झंडे तले मत जाने दीजिए। यह लड़ाई व्यवस्था को पटरी पर लाने की है, किसी को चुनाव जिताने या हराने की नहीं।
घरों से बाहर निकलिए, एकजुट होइए: जब तक बीकानेर का व्यापारी, युवा, बुद्धिजीवी और आम नागरिक एक मंच पर नहीं आएगा, तब तक यह कुंभकर्णी प्रशासन अपनी नींद से नहीं जागेगा।
शांतिपूर्ण मगर अटूट संकल्प: हमारा विरोध पूरी तरह लोकतांत्रिक और शांतिपूर्ण होगा, लेकिन पोखरण की तरह इतना दृढ़ होगा कि जब तक धरातल पर काम शुरू नहीं होता, हम कदम पीछे नहीं हटाएंगे।
लोकतंत्र में कुर्सी पर बैठने वाले से बड़ी ताकत उस कुर्सी को बनाने वाले की होती है। पोखरण ने रास्ता दिखा दिया है, अब बीकानेर को जागना होगा। आइए, पार्टियों से ऊपर उठकर, सिर्फ और सिर्फ बीकानेर के सच्चे नागरिक बनकर अपने हक के लिए एक साथ खड़े हों!
— जागरूक आम नागरिक: नारायण जैन (बीकानेर)














